इंसान के पाच अवगुण - Hindi Story
एक फकीर को रास्ते में एक सौदागर मिला, जो पाच गधों पर बड़ी-बड़ी गठरिया लादे हुए जा रहा था|
फकीर ने सौदागर से प्रश्न किया, इन गठरियो में तुमने ऐसी कौन सी चीजे रखी है, जिन्हें ये बेचारे गधे ढो रहे है ?
सौदागर ने कहा - इनमे इंसान के इस्तेमाल कि चीजे भरी है| उन्हें बेचने में बाज़ार जा रहा हू| फकीर ने पूछा, अच्छा ! कौन कौन सी चीजे है|
सौदागर ने कहा - यह जो पहला गधा आप देख रहे है इस पर अत्याचार कि गठरी लदी है|
फकीर ने पूछा - इसे कौन खरीदेगा ?
सौदागर ने कहा - इसके खरीददार है राजा-महाराजा और सत्ताधारी लोग|
फकीर ने पूछा - इस दूसरी गठरी में क्या है?
सौदागर बोला, यह गठरी अहंकार से लबालब भरी है और इसके खरीददार है पंडित और विद्वान| तीसरे गधे पर ईर्ष्या की गठरी लदी है और इसके ग्राहक है वे धनवान लोग, जो एक दूसरे की तरक्की को बर्दास्त नहीं कर पाते| इसे खरीदने के लिए तो लोगो का तांता लगा रहता है|
फकीर ने पूछा, अच्छा! चौथी गठरी में क्या है भाई ? सौदागर ने कहा - इसमें बेईमानी भरी है और इसके ग्राहक है वे कारोबारी, जो बाजार में धोखे से की गई बिक्री से काफी फायदा उठाते है और इसलिए बाजार में इसके भी खरीददार तैयार खड़े है|
फकीर ने पूछा - अंतिम गधे पर क्या लदा है ? सौदागर ने जवाब दिया, इस गधे पर छल-कपट से भरी गठरी रखी है और इसकी मांग उन औरतो में बहुत ज्यादा है जिनके पास घर में कोई काम-धंधा नहीं है और जो छल-कपट का सहारा लेकर दूसरों कि लकीर छोटी कर अपनी लकीर बड़ी करने कि कोशिश करती रहती है और वे ही इसकी खरीददार है तभी महात्मा कि नींद खुल गयी और सपने में उन्हें उनके सारे प्रश्नों का उत्तर मिल गया था|
यदि इंसान अपने इन पाच अवगुणों को छोड़कर अपने गुणों पर ध्यान दे तो वो जो पाना चाहता है पा सकता है